Tuesday, October 4, 2022
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रंगों के त्योहार होली से जुड़े रोचक तथ्य Wishing HOLI from Skypresso.com

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प्रिय पाठक, आप सभी को Skypresso.com के पुरे टीम की ओर से उमंग के पर्व HOLI की हार्दिक शुभकामनाएं। आप सब सदैव प्रसन्न रहे।

मित्रों, HOLI भारत का एक प्रमुख और महत्वपूर्ण त्यौहार है, जो आज पुरे दुनिया भर में मनाया जाने लगा है। HOLI रंगो का, उत्साह का, हर्सोल्लास का, मस्ती का, त्यौहार है। यह रंगो का त्यौहार पारम्परिक रूप से दो दिनों तक मनाया जाता है। पहले दिन होलिका जलाई जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते है। दूसरे दिन रंगो गुलाल अबीर से खेला जाता है, इसे होली, धुरेड़ी, फगुआ, छारंडी आदि भी कहते है।

कब मनाते है होली ?

HOLI वसंत ऋतू में मनाया जाता है। यह पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। वर्ष 2022 में यह 18 मार्च को मनाया जाना है। फाल्गुन माह में मनाये जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते है। राग रंग का यह लोकप्रिय पर्व वसंत ऋतू का संदेशवाहक भी है।

क्यों मनाते हैं होली ?

HOLI पर्व से जुडी हुई अनेक प्रचलित मान्यताये है। इन सब मान्यताओं में सबसे प्रसिद्ध मान्यता है भक्त प्रह्लाद की। प्राचीन मान्यताओं व धर्म ग्रंथो के अनुसार प्राचीन कल में हिरण्यकश्यपु नाम का एक बलवान दानव था। वह अहंकार में स्वयं को ही ईश्वर मानने लगा था। हिरण्यकश्यपु का एक पुत्र था, जिसका नाम था प्रह्लाद। प्रह्लाद नारायण भक्त था। वह हमेशा विष्णु भगवान की पूजा करता रहता था। हिरण्यकश्यपु उससे चिढ़ता था। उसने प्रह्लाद को बहुत समझाया पर प्रह्लाद पर कोई असर न होते देख वह उसको मारने के लिए तरह तरह के योजना बनाने लगा।

holika dahan

जब कोई भी योजना सफल नहीं हुआ तब अंत में उसने अपनी बहन होलिका को बुलाया। होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। हिरण्यकश्यपु के कहने पर होलिका प्रह्लाद को लेकर आग में बैठ गयी। प्रह्लाद बिना घबराये प्रभु का नाम लेता रहा। कुछ समय पाश्चत होलिका आग में जलने लगी और इसी आग में वो जल के मर गयी। प्रह्लाद अब भी सुरक्षित था। होलिका के आग में जलने के ही कारण तब से लेकर आज तक होलिका दहन किया जाता है।

अन्य मान्यता यह है की भगवान श्री कृष्ण काले थे। सब उन्हें चिढ़ाते थे। भगवान ने इससे बचने के लिए सभी गोपियों, बाल गोपालों, बृज वासियों को तरह तरह के रंगो से रंगना प्रारम्भ क्र दिए। तब से लेकर के आज तक इस प्रथा को बड़े ही आनंद से हम होली के रूप में मानते है।

होली मनाने के उद्देश्य

HOLI मनाने का मुख्य उद्देश्य धार्मिक निष्ठा, मनोरंजन, उत्सव है। इसका उद्देश्य भेदभाव व कटुता को दूर करना है। होली के दिन हम सब बैर, सारी पुरानी बातें भूलकर सबको लगाते है। जब सबके चेहरे नाना प्रकार के रंगो से बोथाये हुए होते है तो यह पता नहीं चलता की कौन कौन है तो सबसे प्यार से बात करते है साथ ही गोरे काले का भेद भी नहीं रहता है। अतः यह त्यौहार समानता की सीख भी देता है।

पौराणिक व प्रचलित परम्पराएँ

HOLI के दिन विभिन्न कार्यक्रम किये जाते है। होली की पूर्व संध्या को माता श्री होलिका दहन किया जाता है। इसमें माता होलिका जी की पूजा कर प्रार्थना की जाती है। उसके अगले दिन यानि धुरेड़ी के दिन सुबह सब नहा के अपने इष्ट देवी देवताओ की आशीर्वाद लेकर दिन की शुरुआत करते है। होली के दिन तरह तरह के स्वादिस्ट पकवान बनाये जाते है।

गुजिया होली का प्रमुख पकवान है। फिर सब परिवार वाले, मोहल्ले वाले, और अन्य भी एक दूसरे और सबको रंग गुलाल लगते है। ढोल नगाड़े बजाये जाते है। दिन भर नाच गाना होता है। लोग इस त्यौहार का खूब आनंद उठाते है। सब एक दूसरे को भोजन या मिठाई खिलाएं है। फिर शाम को सब नहा धोकर घर में आराम करते है।

त्योहार से संदेश

HOLI त्योहार से हमें बहुत से संदेश मिलते हैं। होली में बस एक रंग लगाने की ही देरी रहता है। जब सब रंगो से नहाये रहते है तो यह तय करना मुश्किल होता है की कौन अमीर है, कौन गरीब है, कौन दोस्त है, कौन दुश्मन है। अर्थात हम सब एक जैसे ही है, भगवान् ने हम सब को समान ही बनाया है। हमे सब से समान रूप से ही व्यवहार करना चाहिए।

कुछ कुप्रथाएं

HOLI के दिन कुछ असामाजिक तत्व नशे का सेवन करते है। शराब, गांजा, भांग आदि पदार्थो का सेवन क्र समाज में हुल्लड़बाजी करते रहते है। त्यौहार के नाम पर यह सही गलत के फर्क को भूल जाते है। जगह जगह झगड़ा करते है। बस यही इस खुबसुरत पर्व में दाग लगा देता है। जितना हो सके होली के पर्व को स्वच्छ और स्वस्थ ढंग से मनाना चाहिए।

अंत में कुछ खास

प्रिय पाठकों, उम्मीद है आप सब को हमारा यह होली का छोटा सा पेशकश पसंद आया होगा। आप सब का सहयोग अब तक हमे मिलता रहा है। आशा है की आगे और भी सहयोग प्राप्त होंगी। एक बार पुनः आप सहपरिवार को हमारे Skypresso.com के पूरी टीम की ओर से होली की अशेष शुभकामनाएं। अपना प्यार और आशीर्वाद बनाये रखने के लिए धन्यवाद्।

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Aman Agrawal
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